तेलडीहा-भीड़-

तेलडीहा दुर्गा मंदिर में नवरात्रि के पहले ही दिन उमड़ी डेढ़ लाख श्रद्धालुओं की भीड़

तेलडीहा दुर्गा मंदिर में नवरात्रि के पहले ही दिन करीब डेढ़ लाख श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी. तेलडीहा दुर्गा मंदिर न सिर्फ बांका जिला और आसपास बल्कि पूरे बिहार और पड़ोस के झारखंड तथा बंगाल प्रांतों के लाखों श्रद्धालुओं के बीच प्रसिद्ध है. शारदीय नवरात्र के अवसर पर यहां बिहार के विभिन्न जिलों के अलावा झारखंड और पश्चिम बंगाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवी मां की पूजा अर्चना के लिए आते हैं. यही वजह है कि शारदीय नवरात्र के सभी 10 दिन यहां लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है

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नवरात्र के पहले ही दिन आज तेलडीहा दुर्गा मंदिर में करीब डेढ़ लाख श्रद्धालु पूजा अर्चना एवं देवी मां का जलाभिषेक करने पहुंचे. तेलडीहा देवी मंडप शायद इस क्षेत्र का अकेला और अनूठा देवी मंदिर है जहां नवरात्रि की प्रथम पूजा के अवसर पर जलाभिषेक की परंपरा है. हालांकि यह परंपरा कब से और किसके द्वारा आरंभ हुई यह तो किसी को नहीं पता, लेकिन नवरात्रि के पहले दिन यहां जलाभिषेक करने की परंपरा निरंतर सघन होती जा रही है और ऐसे श्रद्धालुओं की भीड़ हर वर्ष बढ़ रही है जो यहां पहली पूजा को जलाभिषेक करने पहुंचते हैं. श्रद्धालु सुल्तानगंज या दूसरे जगह पर स्थित गंगा तट से जल लेकर पैदल यात्रा करते हुए तेलडीहा पहुंचकर मां का जलाभिषेक करते हैं. लेकिन भारी भीड़ होने की वजह से आमतौर पर वे जलाभिषेक की सिर्फ औपचारिकता भर पूरी कर पाते हैं. ज्यादातर श्रद्धालुओं को मंदिर की छत पर अपना जल रखकर वापस लौटना पड़ता है.

तेलडीहा-मंदिर

नवरात्र की पहली पूजा के अवसर पर यहां लगने वाले जलाभिषेक मेले में आने वाली बेहिसाब भीड़ को नियंत्रित कर पाना बांका जिला प्रशासन के लिए टेढ़ी खीर होती है. हालांकि इस प्रयास में बांका पुलिस को मुंगेर जिले की तारापुर पुलिस भी सहयोग करती है. तेलडीहा देवी मंडप एक ऐसा अनूठा दुर्गा मंदिर है जहां देवी दुर्गा के साथ साथ श्री कृष्ण एवं मां काली की भी पूजा होती है. यहां नवरात्रि के अवसर पर मेढ़ भी तीनों देवी देवताओं के एक साथ बनते हैं. मतलब तीनों देवी देवता एक ही मेढ़ पर विराजित होते हैं.

तेलडीहा देवी मंडप में मां भगवती की पूजा तांत्रिक एवं बांग्ला विधि से होती है. यहां नवरात्र के प्रत्येक दिन सैकड़ों पशु बलि दी जाती है. सप्तमी, अष्टमी एवं नवमी को यहां अनगिनत बली पड़ती है. इन तीन दिनों में यहां पड़ने वाली बलि की संख्या तकरीबन 20 हजार के पार पहुंच जाती है. इस दौरान मंदिर परिसर और आसपास कई बार स्थिति अनियंत्रित हो जाती है. अनियंत्रित होने वाली स्थिति से कई बार हादसे भी हो जाते हैं. ऐसे ही एक हादसे में कुछ वर्ष पूर्व 8 लोगों की मौत हो गई थी. हालांकि इस हादसे के बाद प्रशासन ने सबक लिया है और यहां सुरक्षा व्यवस्था की मेला पूर्व व्यापक तैयारियां की जाती है. इस वर्ष भी बांका एवं मुंगेर जिला प्रशासन एवं पुलिस के अधिकारी तेलडीहा मेले में उमड़ने वाली भीड़ की सुरक्षा और सामान्य कानून व्यवस्था संधारण को लेकर पहले से काफी गंभीर होने का दावा कर रहे हैं.

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