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घोटाला – गोरखपुर के रामगढ झील में बड़ी गोलमाल की खबर आ रही है | सीडीओ करेंगी जांच

 

करोड़ों रुपये खर्च के बाद भी रामगढ़झील की सूरत बदलती नहीं दिख रही है। झील के कार्य को लेकर एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप लग रहा है। कार्य करने वाली फर्म और जलनिगम के अफसर एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। फर्म की शिकायत पर डीएम ने पूरे प्रकरण की जांच सीडीओ को सौंपी है। रामगढ़ झील में कार्य करने वाली फर्म बालाजी एसोसिएट ने डीएम से शिकायत की थी कि एलसीएस बोरिंग और सबमर्शिबल मोटर के भुगतान को जनबूझ कर परियोजना प्रबंधक द्वारा रोका गया है।

 

 

बगैर भुगतान के ही कार्य को आगे जारी रखने का दबाव बनाया जा रहा था। फर्म का आरोप है कि अप्रैल में कार्य के बाद भी भुगतान नहीं किया गया और बाद में सुरक्षा राशि को जब्त करने की कार्रवाई कर दी गई। डीएम ने पूरे प्रकरण को लेकर जांच सीडीओ को सौंप दी है। सीडीओ ने मामले की जांच के लिए अधिशासी अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण, सहायक अभियंता, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण और लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता की कमेटी का गठन किया है। सीडीओ ने कमेटी से सप्ताह भर में रिपोर्ट मांगी है।

 

 

 

जलनिगम के मुख्य अभियंता का कहना है कि बार-बार नोटिस के बाद भी फर्म द्वारा कार्य में लेट लतीफी की जा रही थी। पहले भी इस फर्म को लेकर शिकायतें मिली थीं। रामगढ़झील परियोजना मुख्यमंत्री के प्राथमिकता की योजना है। ऐसे में लेटलतीफी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जांच में सभी तथ्य सामने आ जाएगीं।

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